Monday, 6 March 2017
Friday, 3 February 2017
Thursday, 2 February 2017
राजस्थान भूगर्भिक शैल संरचना
- राजस्थान में आर्यन महाकल्प से लेकर अभिनूतन युग तक की भूगर्भीय शैली संरचनाएं पाई जाती हैं।
- राजस्थान की भू-गर्भिक संरचना भारत के अन्य राज्यों की तुलना में विशिष्ट है क्योंकि जहां एक ओर प्राचीनतम प्री -कैंब्रियन युग की शैलों से युक्त अरावली पर्वतमाला है तो दूसरी ओर वायु द्वारा जमा की गई अत्याधुनिक मृदा।
- अरावली पर्वतमाला में एक और जहां प्राचीन ग्रेनाइट एवं नीस के शैल है वही उसी के साथ साथ देहली एवं विंध्य समूह के शैल भी मौजूद हैं।
- हाड़ोती का पठार,मालवा के पठार का ही एक भाग है।
- आर्यन तथा प्री कैंब्रियन योग्य संरचनाओं का हादसा दृष्टिगोचर होना राज्य के महत्वपूर्ण भूगर्भीय की विशेषता है।
- राजस्थान की भूगर्भीय संरचना में भौमकीय कालानुक्रम में परिवर्तन आए हैं, जो यहां की शैल संरचना में स्पष्ट दृष्टिगोचर होते हैं राजस्थान की भूगर्भिक संरचना का वर्णन क्रमशः आद्य महाकल्प,पुरजीवी महाकल्प, प्राद्यजीवी महाकल्प के रुप में किया जाता है।
- आद्य महाकल्प जो 42,500 से 4,5000 लाख वर्ष प्राचीन है,इसके संदर्भ में अरावली पूर्व एवं कैंब्रियन पूर्व को वर्णित किया जाता है। कैंब्रियन पूर्व के अंतर्गत रावली महासंघ एवं देहली महासंघ आते हैं।
- पूरा जीवी महाकल्प के संदर्भ में विंध्य महासंघ एवं परमियान कार्बोनिफेरस( बाप बोल्डर बैड व् भादुरा कालूकाश्म) को वर्णित किया जाता है।
- प्राद्यजीवी(नवजीवी) महाकल्प को जीवाश्म, अश्वंवैन्यासिक एवं हिमनदन की घटनाओं के आधार पर तृतीयक कल्प व क्वार्टरनरी(चतुर्थक) कल्प में विभक्त किया गया है।
- तृतीयक (टर्शियरी) कल्प के शैल समूह मुख्यतः नागौर, बीकानेर ,जैसलमेर एवं बाड़मेर जिले में बालुकाश्म,जीवाश्म युक्त चूने का पत्थर, बेंटोनिटिक मृदिकाए, मुल्तानी मिट्टी एवं लिग्नाइट आदि रूप में विद्यमान है।
- राजस्थान की प्राचीनतम चट्टाने ‘बैंडेड- नाइसिक- कॉन्पलेक्स’है जो आर्कियन युग के जालोढ निक्षेप एवं बालूका स्तरिकी के रूप में है। यह चट्टाने भीलवाड़ा, चित्तोड़गढ़, राजसमंद एवं उदयपुर जिले में पाई जाती है।
- अरावली पर्वत श्रंखला कैंब्रियन पूर्व युग की अरावली एवं दिल्ली महासंघ के कायांतरिक चट्टानों प्रमुखत: नाइस, शिस्ट, क्वार्टजाइट,संगमरमर इत्यादि से बनी हुई है।
- जोधपुर एवं नागौर जिले में स्थित मारवाड़ महासंघ के बालूका पत्थर एवं चूना पत्थर के निक्षेप प्रोटोरोजाइक काल के है।
- राज्य के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में विस्तृत मालाणी आग्नेय श्रंखला के तहत रायोलाइट एवं जालौर- सिवाना ग्रेनाइट के जमाव मिलते हैं।
- जैसलमेर एवं बाड़मेर जिलों में पीले पत्थर का जमाव मिलते है।
- आर्कियन जलोढ़ चट्टानों की सबसे विस्तृत पेटी आमेट (राजसमंद) से खेतड़ी (झुंझुनू) तक के 300 कि. मी. की लंबाई में पाई है, जो ‘सांडमाता कॉन्पलेक्स’ कहलाता है।
- अरावली महासंघ की चट्टानें जोकि 20 से 25 हजार लाख वर्ष पुरानी है कांकरोली (राजसमंद) से बांसवाड़ा तक पायी जाती है। अरावली महासंग से सबसे पुरानी चट्टाने देबारी संघ की है। अरावली महासंघ के सबसे नवीन जमाव लूनावाड़ संघ के रुप में पाई जाती है।
- रायलो संघ की चट्टाने जयपुर एवं अलवर जिलो में पाई जाती है इनके सबसे अच्छे जमाव टहला एवं बलदेवगढ़ के आस-पास मिलते हैं।
- विंध्यन महासंघ की चट्टाने राजस्थान में निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) से धोलपुर तक विस्तृत है इसमें चूना पत्थर,बलुआ पत्थर, शैल एवं शिस्ट के महत्वपूर्ण जमाव हैं।
- राजस्थान में डेकन ट्रेप (क्रिटेशस लावा प्रवाह) के महत्वपूर्ण जमाव हाड़ौती क्षेत्र एवं मेवाड़ के दक्षिण- पूर्वी क्षेत्र मिलते हैं।
- टर्शियरी (तृतीयक) महाकल्प के महत्पूर्ण जमाव जीवाश्म मय बालूका पत्थर, मृतिका एवं लिग्नाइट के रूप में जैसलमेर, बाड़मेर ,नागौर एवं बीकानेर जिलों में मिलते हैं।
Tuesday, 31 January 2017
Tuesday, 24 January 2017
Monday, 23 January 2017
राजस्थान सामान्य परिचय
- हमारे प्रदेश राजस्थान को आदिकाल से आज तक मरुकान्तर,मरु, मरुदेश, मरूवार, रायथान, राजपूताना,रजवाड़ा, राजस्थान इत्यादि नामों से जाना जाता रहा है। वाल्मीकिकृत रामायण महाकाव्य में हमारे प्रदेश के लिए ‘मरुकान्तर’ शब्द का प्रयोग हुआ है।
- राजस्थान शब्द का प्राचीनतम ज्ञात स्रोत बसंतगढ़ (सिरोही) का शिलालेख है,जिसमें ‘राजस्थानीयादित्य’ शब्द उत्कीर्ण है।
- ‘ मुहणोत नैणसी की ख्यात’ एवं ‘राजरूपक’नामक ग्रंथों में भी ‘राजस्थान’ शब्द का उल्लेख हुआ है।
- राजपूत काल एवं मध्यकाल में यहां पर राजपूत राजाओं ने शासन किया, अतः यह क्षेत्र ‘राजपूताना’ कहलाया। ‘राजपूताना’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1800 ई.में जॉर्ज थॉमस ने किया था। अंग्रेजी शासनकाल में यह क्षेत्र ‘राजपूताना’ के नाम से जाना जाता था।
- प्रसिद्ध अंग्रेज इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने 1829 ई. में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘एनाल्स एंड एंटिक्विटीज ऑफ राजस्थान’( सेंट्रल एंड वेस्टर्न राजपूत स्टेट्स ऑफ इंडिया) में इस प्रदेश के लिए तीन शब्दों ‘रजवाड़ा’ रायथान,एवं राजस्थान का प्रयोग किया।
- स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात एकीकरण की प्रक्रिया में 25 मार्च 1948 को गठित ‘पूर्व राजस्थान संघ’ में पहली बार राजस्थान शब्द का प्रयोग हुआ। 26 जनवरी 1950 को इस प्रदेश का नाम विधिवत रूप से ‘राजस्थान’ रखा गया।
- स्वतंत्रता प्राप्ति के समय राजस्थान में 19 देशी रियासतें, तीन ठिकाने (लावा,नीमराणा,कुशलगढ़)एवं अजमेर- मेरवाड़ा केंद्र शासित प्रदेश थे।इन सबके एकीकरण के पश्चात 1 नवंबर, 1956 को राजस्थान का वर्तमान स्वरूप सामने आया।
- एकीकरण के चौथे चरण में 30 मार्च,1949 को राज्य की चार वृहद रियासतों जोधपुर, जयपुर, बीकानेर एवं जैसलमेर के विलय से एकीकरण का अधिकांश कार्य पूर्ण हुआ। इस इकाई का नाम ‘वृहद राजस्थान’रखा गया। एकीकरण का अधिकांश कार्य 30 मार्च 1949 को पूरा होने पर इसे राजस्थान के गठन की तिथि माना गया। इसी उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 30 मार्च राजस्थान को ‘राजस्थान दिवस’ मनाया जाता है।
- एकीकरण के छः चरणों के पश्चात 26 जनवरी 1950 को राज्य में जिलों की संख्या 25 थी,जो बढ़कर वर्तमान में 33 हो गई है।
- 1 नवंबर 1956 को ‘अजमेर मेरवाड़ा’ (‘सी’ श्रेणी का एक राज्य) का राजस्थान में विलय करके अजमेर को राजस्थान का 26 वाँ जिला बनाया गया। जयपुर जिले की किशनगढ़,अराई ,सरवाड़ एवं रूपनगढ़ तहसीलों को भी नवगठित अजमेर जिले में सम्मिलित किया गया।
- 15 अप्रैल 1982 को भरतपुर जिले की चार तहसीलों धोलपुर, राजाखेड़ा, बाड़ी एवं बसेड़ी को अलग करके राज्य का 27 वाँ जिला धोलपुर गठित किया गया।
- 10 अप्रैल 1991 को कोटा जिले की 7 तहसीलों बाराँ, मांगरोल,छबड़ा, अटरू, छिपाबड़ोद, शाहाबाद एवं किशनगंज को अलग करके राज्य का 28वाँ जिला बाराँ बनाया गया।
- 10 अप्रैल 1991 को जयपुर जिले की दौसा,बसवा, लालसोट एवं सिकराय चार तहसीलों को अलग करके राज्य का 29 वाँ जिला दौसा बनाया गया। बाद में 15 अगस्त 1992 को सवाई माधोपुर जिले की महवा तहसील को भी दौसा जिले में सम्मिलित किया गया।
- 10 अप्रैल 1991 को उदयपुर जिले की 7 तहसीलों राजसमंद, नाथद्वारा, रेलमगरा, कुंभलगढ़,आमेट,भीम एवं देवगढ को लेकर राज्य का 30 वाँ जिला राजसमंद बनाया गया।
- 12 जुलाई 1994 को श्री गंगानगर जिले से हनुमानगढ़ पीलीबंगा,टिब्बी, संगरिया, नोहर, भादरा एवं रावतसर सात तहसीलों को अलग करके हनुमानगढ़ के राज्य का 31वाँ जिला बनाया गया।
- 19 जुलाई 1997 को सवाई माधोपुर जिले की 5 तहसीलों करौली, सपोटरा,हिंडौन, टोडाभीम एवं नादौती को अलग करके राज्य के 32वे जिले करौली का गठन किया गया।
- 26 जनवरी 2008 को चित्तौड़गढ़ जिले से प्रतापगढ़, छोटी सादड़ी, एवं अरनोद तहसील,उदयपुर जिले की धरियावद तहसील एवं बांसवाड़ा जिले की घाटोल तहसील में से पीपलखुट को अलग तहसील बनाकर राज्य के नवगठित 33वे जिले प्रतापगढ़ में सम्मिलित किया गया।
राजस्थान प्रशासनिक स्वरूप
- प्रशासनिक दृष्टि से राज्य को सात संभाग में बांटा गया है संभागीय व्यवस्था वर्ष 1949 से प्रारंभ हुई, उस समय पांच संभाग- जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर बनाए गए। यह व्यवस्था 1962 में श्री मोहनलाल सुखाडिया के मुख्यमंत्रित्वकाल में समाप्त कर दी गई।
- 26 जनवरी,1987 को श्री हरिदेव जोशी के मुख्यमंत्रित्व काल में पुनः संभागीय व्यवस्था प्रारंभ की गई। पहले के 5 संभागों के अलावा अजमेर को छोटा संभाग बनाया गया। वर्तमान में कुल सात संभाग है सातवा संभाग भरतपुर 4 जून 2005 को बना।
- संभागीय स्तर पर सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी संभागीय आयुक्त एवं पुलिस विभाग का मुखिया पुलिस महानिरिक्षक होता है।
- स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात 30 मार्च 1950 से 1 नवंबर, 1956 तक महाराजा सवाई मानसिंह राजस्थान के एकमात्र राजप्रमुख (राज्यपाल के समकक्ष) रहे,जो बाद में स्पेन में भारत के प्रथम राजदूत रहे।
- राज्य के पहले आम चुनाव जनवरी,1952 में हुए। इस चुनाव में राज्य विधानसभा में 160 सीटें थी। राज्य की पहली विधान सभा की पहली बैठक 29 मार्च,1952 को जयपुर के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में संपन्न हुई, यही टाउन हॉल विधानसभा भवन बन गया।
- राजस्थान विधानसभा का नया भवन ज्योति नगर (जयपुर) में वर्ष 2001 में जोधपुर एवं करौली के पत्थरों से बनाया गया। इस भवन का लोकार्पण तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर.नारायणन ने 6 नवंबर, 2001 को किया।भवन के चार प्रवेश द्वारों में जयपुर, मेवाड़, जोधपुर,एवं शेखावटी क्षेत्र की स्थापत्य कला झलकती है।
- राज्य के प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री श्री हरी लाल शास्त्री(07.04.1949 से 05.01.1951 तक) जोबनेर (जयपुर) के निवासी थे जबकि राज्य के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री श्री टीकाराम पालीवाल,(03.03.1952 से 31.10.1952) मंडावर (अलवर) के निवासी थे।
- राजस्थान में अनुसूचित जाति के पहले मुख्य-मंत्री जगन्नाथ पहाड़िया,(06.06.1980 से 13.07.1981) भुसावर (भरतपुर) के निवासी थे।
- राज्य में सर्वाधिक अवधि तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड मोहनलाल सुखाडिया के नाम है।स्व. सुखाड़िया 1954 से 1971 तक लगभग 17 वर्ष तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं इन्हें ‘आधुनिक राजस्थान का निर्माता’ कहा जाता है।
- श्री हीरालाल देवपुरा(23.02.1985 से 10.03.1985) राजस्थान में सबसे कम अवधि के लिए मुख्यमंत्री बने रहे हैं (मात्र 16 दिन)
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